मध्य प्रदेश

मुरैना

प्राचीन मंदिर · प्रागैतिहासिक गुफाएँ · चम्बल का जंगल

गुर्जर-प्रतिहार साम्राज्य की राजधानी — जहाँ 1,000 वर्ष पुराने मंदिर, संसद भवन की प्रेरणा और 25,000 वर्ष पुराने शैल चित्र एक साथ मिलते हैं

6प्रमुख स्थल
25,000+वर्ष इतिहास
200+प्राचीन मंदिर
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Bateshwar Temple Complex
Bateshwar Temple Complex - 2
8वीं–10वीं शताब्दी

बटेश्वर मंदिर समूह

भारत का भूला हुआ अंगकोर वाट

लगभग 200 बलुआ पत्थर के हिन्दू मंदिरों का विशाल समूह, जो गुर्जर-प्रतिहार शैली में 8वीं से 10वीं शताब्दी के बीच निर्मित हुए। ये मंदिर शिव, विष्णु और शक्ति को समर्पित हैं और लगभग 25 एकड़ में फैले हैं।

🏛️~200 मंदिर, 25 एकड़ में विस्तृत
🔨2005 से ASI द्वारा पुनर्स्थापन — 60+ मंदिर पुनर्निर्मित
📜गुर्जर-प्रतिहार राजाओं द्वारा निर्मित
📍 मुरैना से ~30 कि.मी.
Chausath Yogini Temple, Mitawali
Chausath Yogini Temple, Mitawali - 2
11वीं शताब्दी

चौसठ योगिनी मंदिर

भारतीय संसद भवन की प्रेरणा

मिताओली गाँव की पहाड़ी पर स्थित यह गोलाकार मंदिर 64 योगिनियों को समर्पित है। कच्छपघात राजा देवपाल (1055-1075 ई.) द्वारा निर्मित, इसमें 64 छोटे कक्ष और केंद्र में खुला शिव मंदिर है। माना जाता है कि इसी की गोलाकार संरचना से नई दिल्ली के संसद भवन का डिज़ाइन प्रेरित हुआ।

🔵170 फीट व्यास की गोलाकार संरचना
🏛️64 कक्ष, प्रत्येक में एक शिवलिंग
🇮🇳संसद भवन (1921-27) की डिज़ाइन प्रेरणा
📍 मुरैना से ~40 कि.मी.
Kakanmath Temple, Sihoniya
Kakanmath Temple, Sihoniya - 2
11वीं शताब्दी

ककनमठ मंदिर

बिना किसी जोड़ के खड़ा — 1000 वर्षों से

सिहोनिया में स्थित यह 11वीं शताब्दी का शिव मंदिर कच्छपघात शासक कीर्तिराज ने अपनी रानी ककनवती के लिए बनवाया था। इसकी सबसे अद्भुत विशेषता — विशाल पत्थर के खंड बिना किसी मसाले, चूने या सीमेंट के आपस में जुड़े हैं। मूल शिखर लगभग 100 फीट ऊँचा था।

🪨शुष्क चिनाई — बिना मसाले/सीमेंट के निर्मित
📏मूल ऊँचाई ~100 फीट (शिखर)
👻स्थानीय किंवदंती — एक रात में अलौकिक शक्तियों ने बनाया
📍 मुरैना से ~25 कि.मी.
National Chambal Sanctuary
National Chambal Sanctuary - 2
1978 में स्थापित

राष्ट्रीय चम्बल अभयारण्य

घड़ियालों और डॉल्फिन का आखिरी गढ़

5,400 वर्ग कि.मी. में फैला यह त्रि-राज्यीय अभयारण्य (मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश) चम्बल नदी के किनारे स्थित है। यहाँ विश्व की सबसे बड़ी जंगली घड़ियाल आबादी, लुप्तप्राय गंगा डॉल्फिन और 316+ पक्षी प्रजातियाँ पाई जाती हैं।

🐊विश्व की सबसे बड़ी जंगली घड़ियाल आबादी
🐬लुप्तप्राय गंगा नदी डॉल्फिन
🦅316+ पक्षी प्रजातियाँ, नाव सफारी उपलब्ध
📍 मुरैना से ~20-30 कि.मी.
Garhi Padavali Temple
Garhi Padavali Temple - 2
8वीं–10वीं शताब्दी

पदावली मंदिर

खजुराहो से दो शताब्दी पुरानी मूर्तिकला

गढ़ी पदावली में 10वीं शताब्दी का शिव मंदिर मण्डप, 18वीं शताब्दी के गोहद के जाट राणाओं द्वारा बनाए गए किले के भीतर सुरक्षित है। इसकी नक्काशी अद्भुत है — रामायण, महाभारत, समुद्र मंथन, कृष्ण लीला और शिव तांडव के दृश्य उकेरे गए हैं। यहाँ की श्रृंगारिक मूर्तियाँ खजुराहो से लगभग दो शताब्दी पुरानी हैं।

🏰18वीं सदी के किले के अंदर सुरक्षित प्राचीन मंदिर
🎨रामायण, महाभारत के दृश्यों की उत्कृष्ट नक्काशी
खजुराहो से ~200 वर्ष प्राचीन श्रृंगारिक शिल्प
📍 मुरैना से ~35 कि.मी.
Pahargarh Rock Shelters
प्रागैतिहासिक (~25,000 वर्ष)

पहाड़गढ़ गुफाएँ

25,000 वर्ष पुराने शैल चित्र

1979 में खोजी गई ये प्रागैतिहासिक शैलाश्रय 600+ शैल चित्रों का खज़ाना हैं। 'लिखीछज' नामक मुख्य शैलाश्रय 100+ फीट चौड़ा है। लाल और सफेद गेरू रंग से बने ये चित्र — नृत्य, शिकार, हाथी की सवारी, ढाल-हथियार लिए मानव आकृतियाँ दर्शाते हैं। यहाँ मिले शुतुरमुर्ग अंडे के छिलकों की रेडियोकार्बन तिथि ~25,000 वर्ष है।

🎨600+ प्रागैतिहासिक शैल चित्र
🦴शुतुरमुर्ग अंडे — रेडियोकार्बन ~25,000 वर्ष
📐लिखीछज शैलाश्रय — 100+ फीट चौड़ा
📍 मुरैना से ~58 कि.मी.

मुरैना की विरासत — दंडोतिया की विरासत

ये स्थल हमारे पूर्वजों की भूमि के गवाह हैं। चम्बल की घाटी से लेकर प्रतिहार मंदिरों तक — यही वह धरती है जहाँ दंडोतिया वंश ने अपनी जड़ें जमाईं।

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